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  • October, 10, 2024
  • by Admin

मन लेके आया माता रानी के भवन में

मन लेके आया,
माता रानी के भवन में ।
बड़ा सुख पाया,
माती रानी के भवन में ।।

मन लेके आया ।
माता रानी के भवन में ।।

जय जय माँ, अम्बे माँ,
जय जय माँ, जगदम्बे माँ ।
जय जय माँ, अम्बे माँ,
जय जय माँ, जगदम्बे माँ ।।

मैं जानू वैष्णव माता,
तेरे ऊँचे भवन की माया ।
भैरव पर क्रोध में आके,
माँ तूने त्रिशूल उठाया ।।

वो पर्बत जहां पे तूने,
शक्ति का रूप दिखाया ।
भक्तो ने वहीँ पे मैया,
तेरे नाम का भवन बनाया ।।

बड़ा सुख पाया,
माती रानी के भवन में ।
मन लेके आया,
माता रानी के भवन में ।।

जय जय माँ, अम्बे माँ ।
जय जय माँ, जगदम्बे माँ ।।

तेरे तेज ने ज्वाला मैया,
जब उजियारा फैलाया ।
शाह अकबर नंगे पैरों,
तेरे दरबार में आया ।।

तेरी जगमग ज्योत के आगे,
श्रद्धा से शीश झुकाया ।
तेरे भवन की शोभा देखी,
सोने का क्षत्र चढ़ाया ।।

बड़ा सुख पाया, बड़ा सुख पाया ।
माती रानी के भवन में ।।

मन लेके आया,
माता रानी के भवन में ।।

जय जय माँ, अम्बे माँ ।
जय जय माँ, जगदम्बे माँ ।।

हे चिंतपूर्णी माता,
तेरी महिमा सबसे न्यारी ।
दिए भाईदास को दर्शन,
तू भक्तो की है प्यारी ।।

जो करे माँ तेरा चिंतन,
तू चिंता हर दे सारी ।
तेरे भवन से झोली भरके,
जाते हैं सभी पुजारी ।।

बड़ा सुख पाया,
माती रानी के भवन में ।
मन लेके आया,
माता रानी के भवन में ।।

जय जय माँ, अम्बे माँ ।
जय जय माँ, जगदम्बे माँ ।।

माँ नैना देवी तूने,
यह नाम भगत से पाया ।
नैना गुज्जर को तूने,
सपने में दरश दिखाया ।।

आदेश पे तेरे उसने,
तेरा मंदिर बनवाया ।
जीवन भर बैठ भवन में,
माँ तेरा ही गुण गया ।।

बड़ा सुख पाया,
माती रानी के भवन में ।

मन लेके आया,
माता रानी के भवन में
बड़ा सुख पाया,
माती रानी के भवन में ।

जय जय माँ, अम्बे माँ,
जय जय माँ, जगदम्बे माँ
जय जय माँ, अम्बे माँ,
जय जय माँ, जगदम्बे माँ

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