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  • November, 23, 2021
  • by Admin

जगन्नाथ होके रथ पे सवार

M:-    आते ही  आषाढ़ मास, भरे हृदय  उल्लास  
    मन्दिर पट खोले चले आए ,प्रभु  भक्तों के पास 
    जगन्नाथ, होके रथ पे सवार – 2
कोरस –     जगन्नाथ, होके रथ पे सवार – 2

M:-    सुभद्रा और बलभद्र  संग -2
    चले  गुण्डिचा  द्वार
    जगन्नाथ, होके रथ पे सवार 
कोरस –     जगन्नाथ, होके रथ पे सवार 
        1.
M:-    राजा सोने की झाड़ू बुहारे  हर्षाते हैं भक्त ये  सारे 
कोरस –     राजा सोने की झाड़ू बुहारे  हर्षाते हैं भक्त ये  सारे
M:-    गूंजे प्रभु वर के जयकारे 
कोरस –     गूंजे प्रभु वर के जयकारे
M:-    खुशियों के बादल से मिलकर-2
       नभ बरसाए रे धार 
    जगन्नाथ, होके रथ पे सवार 
कोरस –     जगन्नाथ, होके रथ पे सवार 
            2.
कोरस :-     आ आ आ आ आ आ आ
M:-    आज का दिन है कितना पावन, ईश्वर भक्ति है  मनभावन
कोरस –     आज का दिन है कितना पावन, ईश्वर भक्ति है  मनभावन
M:-    भीड़ खड़ी करने को दर्शन 
कोरस –     भीड़ खड़ी करने को दर्शन
M:-    अपने सेवक -2 जन की श्रद्धा, कर लेना  स्वीकार 
    जगन्नाथ, होके रथ पे सवार 
कोरस –     जगन्नाथ, होके रथ पे सवार 
        3.
M:-    हरेक मन में जगी है शुभ आस ,भक्ति  अपनी रहे ये अविनाश 
कोरस-     हरेक मन में जगी है शुभ आस ,भक्ति  अपनी रहे ये अविनाश
M:_    तुझसे जीवन का हो आभास  
कोरस –     तुझसे जीवन का हो आभास   
M:-    पूरब में पुरी  पश्चिम द्वारिका, -2  महिमा इनकी अपार 
    जगन्नाथ, होके रथ पे सवार 
कोरस –     जगन्नाथ, होके रथ पे सवार
M:-    सुभद्रा और बलभद्र  संग -2
    चले  गुण्डिचा  द्वार
    जगन्नाथ, होके रथ पे सवार 
कोरस –     जगन्नाथ, होके रथ पे सवार -4

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दासी हु तेरी श्यामा

कृष्णा हिंदू धर्म में एक प्रमुख देवता है। उन्हें विष्णु के आठवें अवतार के रूप में और अपने आप में सर्वोच्च भगवान के रूप में भी पूजा जाता है।

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