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  • November, 15, 2021
  • by Admin

ये है गंगा नहाते चलो

श्रद्धा के फूल चढ़ाते चलो ये है गंगा नहाते चलो 
तन ये दोबारा मिले ना मिले जीवन को पावन बनाते चलो 
ये है गंगा नहाते चलो 
इसने तारे लोभी ढोंगी ऋषि मुनियो को तारा 
पाप हरिणी मोक्ष तारिणी इसकी निर्मल धरा 
अमृत है माथे लगते चलो ये है गंगा नहाते चलो 
ये है गंगा नहाते चलो 
ब्रम्ह सुता गंगा कल्याणी भागीरथी संग आयी 
गोमुख से गंगा सागर तक धरा बन लहराई 
घट घट पे दिप जलाते चलो ये है गंगा नहाते चलो 
ये है गंगा नहाते चलो 
अंत समय तन राख में मिलके जब गंगा तट आये 
ममता के आँचल में उसको गंगा गोद सुलाए 
इस दर पे शीश नवाते चलो ये है गंगा नहाते चलो 
ये है गंगा नहाते चलो 
श्रद्धा के फूल चढ़ाते चलो ये है गंगा नहाते चलो 
 

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