बद्रीनाथ मे क्यों नहीं बजाया जाता शंख :
क्या आपको पता है चारों धाम में सर्वश्रेष्ठ कहे जाने वाले बदरीनाथ में शंख नहीं बजाया जाता? खासकर जब शंख भगवान विष्णु की पूजा का जरूरी हिस्सा है। इस मंदिर में शंख नहीं बजाने के पीछे ऐसी मान्यता है कि एक समय में हिमालय क्षेत्र में दानवों का बड़ा आतंक था । वो इतना उत्पात मचाते थे कि ऋषि मुनि न तो मंदिर में ही भगवान की पूजा अर्चना तक कर पाते थे और न ही अपने आश्रमों में रह पाते थे । राक्षसों के इस उत्पात को देखकर ऋषि अगस्त्य ने मां भगवती को मदद के लिए पुकारा, जिसके बाद माता कुष्मांडा देवी के रूप में प्रकट हुईं और अपने त्रिशूल और कटार से सारे राक्षसों का नाश कर दिया ।
हालांकि, आतापी और वातापी नाम के दो राक्षस मां कुष्मांडा के प्रकोप से बचने के लिए भाग गए । इसमें से आतापी मंदाकिनी नदी में छुप गया जबकि वातापी बद्रीनाथ धाम में जाकर शंख के अंदर घुसकर छुप गया और उसके बाद से ही यहां पर शंक बजाना मना हो गया जो कि आज भी वैसा ही हैं ।
कृष्णा हिंदू धर्म में एक प्रमुख देवता है। उन्हें विष्णु के आठवें अवतार के रूप में और अपने आप में सर्वोच्च भगवान के रूप में भी पूजा जाता है।
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