झुंझुनू वाली दादी,
ममता की मूरत है,
सारे जग से दादी माँ,
तेरी प्यारी सूरत है,
झुंझनू वाली दादी,
ममता की मूरत है।।
तर्ज – गुरुदेव दया करके।
जिसने जो भी माँगा,
दादी तुमसे पाया,
हर पल रहती दादी,
तेरी ममता की छाया,
हर जनम में दादी माँ,
हमें तेरी जरूरत है,
झुंझनू वाली दादी,
ममता की मूरत है।।
हे अमर सुहागण माँ,
जग की सेठानी है,
हम दीन दुखी दर के,
तू जग धणियाणी है,
तुझसे ही श्रष्टि माँ,
ये सारी कुदरत है,
झुंझनू वाली दादी,
ममता की मूरत है।।
श्रृंगार की शोभा माँ,
लगती बड़ी प्यारी है,
सर पे चुनड़ी हाथां,
मेहन्दी की लाली है,
‘कुंदन’ कहे दादी से,
तू संसार की पूरक है,
झुंझनू वाली दादी,
ममता की मूरत है।।
झुंझुनू वाली दादी,
ममता की मूरत है,
सारे जग से दादी माँ,
तेरी प्यारी सूरत है,
झुंझनू वाली दादी,
ममता की मूरत है।।
कृष्णा हिंदू धर्म में एक प्रमुख देवता है। उन्हें विष्णु के आठवें अवतार के रूप में और अपने आप में सर्वोच्च भगवान के रूप में भी पूजा जाता है।
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